तुम्हारा नाम लिख

डाला था मैंने बादल के

छोटे छोटे टुकड़ों पर

और जानते हो फ़िर बारिश हुयी

बारिश कि हर एक बूंद पर तुम्हारा ही नाम लिखा था

और वो बूंदे सींच रही थी

मेरे तन को मेरे मन को और मेरी आत्मा को

मेरे एकांत में भी तुम्हारा प्रेम मेरे कलेजे के द्वार खटखटा ही देता है

अगर मैं इज़ाज़त ना भी दू तो मेरे सिरहाने आके बैठ ही जाता है

क्यों पढ़ लिया है तुमने मुझे किसी किताब की तरह क्या कंठस्थ करने को और कुछ नही था तुम्हारे पास?

आराधना____

ख्वाबो के घोसले

मेरे ख्वाबो के घोसले जीर्ण-शीर्ण ना हो

इस लिए मैने तुम्हारे साथ बीते हुए लम्हों के तिनको की

यादो से उन्हें सुरक्षित रखा है

कोई क्षति ना होने पाए उन खवाबों को इसका पूरा ध्यान रखती हूँ।